बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह आप पुरोहितका रूप बनाकर उसकी सुन्दर सेजपर जा लेटा। राजा सबेरा होनेसे पहले ही जागा और अपना घर देखकर उसने बड़ा ही आश्चर्य माना॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 174 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।।
जागेउ नृप अनभएँ बिहाना। देखि भवन अति अचरजु माना।।
स्रोत अभिलेख 1.172 · पुस्तक पृ. 174, 175
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।।
English explanation
He assumed the priest’s form himself and went to lie on that beautiful bed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपु | स्वयं | himself |
| बिरचि | बनाकर; धारण करके | fashioning; assuming |
| उपरोहित | राजपुरोहित का | of the royal priest |
| रूपा | रूप | form; appearance |
| परेउ | लेट गया | lay down |
| जाइ | जाकर | having gone |
| तेहि | उस | that |
| सेज | शय्या पर | on the bed |
| अनूपा | अनुपम; अत्यंत सुंदर | matchless; beautiful |
2 जागेउ नृप अनभएँ बिहाना। देखि भवन अति अचरजु माना।।
English explanation
The king awoke before dawn and was greatly astonished to see his palace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जागेउ | जाग उठा | awoke |
| नृप | राजा | the king |
| अनभएँ | अभी न हुए | before it had come |
| बिहाना | भोर; सवेरा | dawn; morning |
| देखि | देखकर | seeing |
| भवन | अपना महल | his palace |
| अति | बहुत | greatly |
| अचरजु | आश्चर्य | astonishment |
| माना | अनुभव किया | felt |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.172
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 174
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 174, 175
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।