बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।।
मूल पाठ
मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।।
दिए दान आनंद समेता। चले बिप्रबर आसिष देता।।
स्रोत अभिलेख 1.295 · पुस्तक पृ. 279, 280
भावार्थ
मूल पाठ के बाद'यह सब मुनिकी कृपा है ऐसा कहकर वे बाहर चले आये। तब रानियोंने ब्राह्मणोंको बुलाया और आनन्दसहित उन्हें दान दिये। श्रेष्ठ ब्राह्मण आशीर्वाद देते हुए चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 280 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।।
English explanation
Saying that this was the sage’s grace, the king went toward the doorway. Then the queens summoned the Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि विश्वामित्र की | of the sage Vishvamitra |
| प्रसादु | कृपा | grace |
| कहि | कहकर | having said |
| द्वार | द्वार की ओर | toward the doorway |
| सिधाए | चले गए | departed |
| रानिन्ह | रानियों ने | the queens |
| तब | तब | then |
| महिदेव | ब्राह्मणों को | the Brahmins |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
2 दिए दान आनंद समेता। चले बिप्रबर आसिष देता।।
English explanation
The queens joyfully gave gifts. The worthy Brahmins departed, giving blessings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिए | दिए | gave |
| दान | दान | charitable gifts |
| आनंद | आनंद | joy |
| समेता | सहित | with |
| चले | चले गए | departed |
| बिप्रबर | श्रेष्ठ ब्राह्मण | worthy Brahmins |
| आसिष | आशीर्वाद | blessings |
| देता | देते हुए | giving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.295
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 280
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 279, 280
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।