बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउस अत्यन्त प्रिय पत्रिकाको आपसमें लेकर सब हृदयसे लगाकर छाती शीतल करती हैं। राजाओंमें श्रेष्ठ दशरथजीने श्रीराम-लक्ष्मणकी कीॢत और करनीका बारंबार वर्णन किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 279 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।।
राम लखन कै कीरति करनी। बारहिं बार भूपबर बरनी।।
स्रोत अभिलेख 1.295 · पुस्तक पृ. 279, 280
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।।
English explanation
They pass the dearly cherished letter among themselves and press it to their hearts, soothing their breasts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लेहिं | लेती हैं | take |
| परस्पर | एक-दूसरे से | from one another |
| अति | अत्यंत | very |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| पाती | पत्र | the letter |
| हृदयँ | हृदय से | to their hearts |
| लगाइ | लगाकर | having pressed |
| जुड़ावहिं | शीतल करती हैं | soothe |
| छाती | अपनी छाती | their breasts |
2 राम लखन कै कीरति करनी। बारहिं बार भूपबर बरनी।।
English explanation
The noble king Dasharatha repeatedly described Rama and Lakshmana’s renown and deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| कै | की | of |
| कीरति | कीर्ति | renown |
| करनी | किए हुए कार्य | deeds |
| बारहिं | बार-बार के अर्थ में ‘बार’ | time, in the expression repeatedly |
| बार | बार | after time |
| भूपबर | श्रेष्ठ राजा दशरथ ने | the noble king Dasharatha |
| बरनी | वर्णन किया | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.295
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 279
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 279, 280
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।