बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता। चले लोक लोचन सुख दाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब लोकोंके नेत्रोंको सुख देनेवाले दोनों भाई मुनिके चरणकमलोंकी वन्दना करके चले। बालकोंके झुंड इन [के सौन्दर्य] की अत्यन्त शोभा देखकर साथ लग गये। उनके नेत्र और मन [इनकी माधुरीपर] लुभा गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 216 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता। चले लोक लोचन सुख दाता।।
बालक बृंदि देखि अति सोभा। लगे संग लोचन मनु लोभा।।
स्रोत अभिलेख 1.219 · पुस्तक पृ. 216, 217
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता। चले लोक लोचन सुख दाता।।
English explanation
Having bowed to sage Vishvamitra’s lotus feet, the two brothers, Rama and Lakshmana, set out, bringing delight to people’s eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि विश्वामित्र के | of sage Vishvamitra |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल; कमल-समान | lotuses; lotus-like |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| चले | चल पड़े | set out |
| लोक | लोगों के | people’s |
| लोचन | नेत्रों को | to the eyes |
| सुख | आनंद | delight |
| दाता | देने वाले | givers of |
2 बालक बृंदि देखि अति सोभा। लगे संग लोचन मनु लोभा।।
English explanation
Seeing their extraordinary beauty, a group of children joined them, their eyes and minds captivated.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालक | बालकों का | of children |
| बृंदि | समूह | group |
| देखि | देखकर | having seen |
| अति | अत्यंत | extraordinary |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| लगे | हो लिए | joined |
| संग | साथ | their company |
| लोचन | आँखें | eyes |
| मनु | मन | mind |
| लोभा | लुभा गए; मोहित हुए | were captivated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.219
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 216
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 216, 217
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।