बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।
मूल पाठ
मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।
कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।।
स्रोत अभिलेख 1.308 · पुस्तक पृ. 290, 290
भावार्थ
मूल पाठ के बादपृथ्वीपति दशरथजीने मुनिकी चरणधूलिको बारंबार सिरपर चढ़ाकर उनको दण्डवत् प्रणाम किया। विश्वामित्रजीने राजाको उठाकर हृदयसे लगा लिया और आशीर्वाद देकर कुशल पूछी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 290 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।
English explanation
AI draft: King Dasharatha prostrated before the sage and repeatedly placed the dust of his feet upon his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिहि | मुनि विश्वामित्र को | to the sage Vishvamitra |
| दंडवत | भूमि पर लेटकर प्रणाम | full prostration |
| कीन्ह | किया | performed |
| महीसा | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| बार | बार | time |
| बार | बार; मिलकर बार-बार | after time; together, repeatedly |
| पद | चरणों की | of the feet |
| रज | धूल | dust |
| धरि | रखकर | placing |
| सीसा | सिर पर | upon his head |
2 कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।।
English explanation
Vishvamitra embraced the king, blessed him, and asked after his well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसिक | कुशिकवंशी मुनि विश्वामित्र | Vishvamitra, sage of Kushika’s lineage |
| राउ | राजा दशरथ को | King Dasharatha |
| लिये | ले लिया | took |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाई | लगाकर | drawing close |
| कहि | कहकर | speaking |
| असीस | आशीर्वाद | a blessing |
| पूछी | पूछा | asked about |
| कुसलाई | कुशल-क्षेम | well-being |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.308
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 290
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 290, 290
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