बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर दोनों भाइयोंको दण्डवत् प्रणाम करते देखकर राजाके हृदयमें सुख समाया नहीं। पुत्रोंको [उठाकर] हृदयसे लगाकर उन्होंने अपने [वियोगजनित] दु:सह दु:खको मिटाया। मानो मृतक शरीरको प्राण मिल गये हों॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 290 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।
सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।।
स्रोत अभिलेख 1.308 · पुस्तक पृ. 290, 290
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।
English explanation
Then the two brothers, Rama and Lakshmana, prostrated. Seeing them, the king’s heart could scarcely contain its joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| दंडवत | भूमि पर लेटकर प्रणाम | full prostration |
| करत | करते हुए | performing |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| देखि | देखकर | seeing them |
| नृपति | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| उर | हृदय में | in the heart |
| सुखु | आनंद | joy |
| न | नहीं | not |
| समाई | समा रहा था | could be contained |
2 सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।।
English explanation
Embracing his sons, the king dispelled his unbearable sorrows, as though a dead body had regained life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्रों को | his sons |
| हियँ | हृदय से | to his heart |
| लाइ | लगाकर | embracing |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| दुख | दुख | sorrows |
| मेटे | मिटा दिए | dispelled |
| मृतक | मृत | dead |
| सरीर | शरीर को | to a body |
| प्रान | प्राण | life |
| जनु | मानो | as though |
| भेंटे | फिर मिल गए | had returned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.308
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 290
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 290, 290
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।