बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर उन्होंने वसिष्ठजीके चरणोंमें सिर नवाया। मुनिश्रेष्ठने प्रेमके आनन्दमें उन्हें हृदयसे लगा लिया। दोनों भाइयोंने सब ब्राह्मणोंकी वन्दना की और मनभाये आशीर्वाद पाये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 290 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।
बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।।
स्रोत अभिलेख 1.308 · पुस्तक पृ. 290, 290
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।
English explanation
Then the two brothers bowed their heads at Vasishtha’s feet. The eminent sage, delighted with love, embraced them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| बसिष्ठ | गुरु वसिष्ठ के | of Vasishtha, their preceptor |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिर | सिर | their heads |
| तिन्ह | उन्होंने; दोनों भाइयों ने | they, the two brothers |
| नाए | झुकाए | bowed |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| मुदित | आनंदित | delighted |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठ ने | the eminent sage Vasishtha |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाए | लगा लिया | embraced them |
2 बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।।
English explanation
Both brothers paid homage to the assembled Brahmins and received blessings pleasing to their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मणों का | of Brahmins |
| बृंद | समूह | assembly |
| बंदे | प्रणाम किया | paid homage to |
| दुहुँ | दोनों | both |
| भाईं | भाइयों ने | brothers |
| मन | मन को | to the heart |
| भावती | प्रिय लगने वाली | pleasing |
| असीसें | आशीर्वाद | blessings |
| पाईं | प्राप्त किए | received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.308
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 290
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 290, 290
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।