बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीने छोटे भाई शत्रुघ्नसहित श्रीरामचन्द्रजीको प्रणाम किया। श्रीरामजीने उन्हें उठाकर हृदयसे लगा लिया। लक्ष्मणजी दोनों भाइयोंको देखकर हॢषत हुए और प्रेमसे परिपूर्ण हुए शरीरसे उनसे मिले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 290 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।
हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।
स्रोत अभिलेख 1.308 · पुस्तक पृ. 290, 290
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।
English explanation
Bharata bowed along with his younger brother Shatrughna. Rama raised them and embraced them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| सहानुज | छोटे भाई शत्रुघ्न सहित | with his younger brother Shatrughna |
| कीन्ह | किया | offered |
| प्रनामा | प्रणाम | obeisance |
| लिए | ले लिया | took them |
| उठाइ | उठाकर | raising them |
| लाइ | लगाकर | drawing close |
| उर | हृदय से | to his heart |
| रामा | राम ने | Rama |
2 हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।
English explanation
Lakshmana rejoiced on seeing the two brothers and embraced them, his whole body filled with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषे | आनंदित हुए | rejoiced |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| देखि | देखकर | seeing |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाइयों भरत और शत्रुघ्न को | brothers Bharata and Shatrughna |
| मिले | गले मिले | embraced them |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| परिपूरित | पूरी तरह भरा हुआ | completely filled |
| गाता | शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.308
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 290
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 290, 290
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।