बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।
मूल पाठ
मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।
जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।।
स्रोत अभिलेख 1.348 · पुस्तक पृ. 329, 330
भावार्थ
मूल पाठ के बादमागध, सूत, भाट और चतुर नट तीनों लोकोंके उजागर (सबको प्रकाश देनेवाले, परम प्रकाशस्वरूप) श्रीरामचन्द्रजीका यश गा रहे हैं। जयध्वनि तथा वेदकी निर्मल श्रेष्ठ वाणी सुन्दर मङ्गलसे सनी हुई दसों दिशाओंमें सुनायी पड़ रही है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 329 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।
English explanation
AI draft: Genealogical bards, heralds, panegyrists, and accomplished performers sing the glory renowned throughout the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागध | वंश-कीर्ति गाने वाले मागध | genealogical bards |
| सूत | वंशावली और यश सुनाने वाले सूत | heralds recounting lineage and glory |
| बंदि | प्रशस्ति गाने वाले बंदीजन | panegyrists |
| नट | नट, कलाकार | performers |
| नागर | कुशल और सुसंस्कृत | accomplished and refined |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| जसु | यश | glory |
| तिहु | तीनों | all three |
| लोक | लोकों में | worlds |
| उजागर | प्रसिद्ध | renowned |
2 जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।।
English explanation
Cries of victory and the pure, noble utterances of the Vedas, suffused with auspiciousness, are heard in all ten directions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जयकार | acclamation of victory |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| बिमल | निर्मल | pure |
| बेद | वेदों की | of the Vedas |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बानी | वाणी | utterances |
| दस | दसों | all ten |
| दिसि | दिशाओं में | in the directions |
| सुनिअ | सुनाई देती है | are heard |
| सुमंगल | शुभ मंगल से | with auspiciousness |
| सानी | सनी हुई | suffused |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.348
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 329
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 329, 330
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।