बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजीकी माता मनमें पछता रही हैं कि हाय! विधाताने अब बनी-बनायी बात बिगाड़ दी। परशुरामजीका स्वभाव सुनकर सीताजीको आधा क्षण भी कल्पके समान बीतने लगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 260 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।।
भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता।।
स्रोत अभिलेख 1.27 · पुस्तक पृ. 259, 260
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।।
English explanation
Sita's mother lamented inwardly: “Fate has now spoiled what had worked out well.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन में | in her heart |
| पछिताति | पछताती हैं | laments; regrets |
| सीय | सीता की | Sita's |
| महतारी | माता | mother |
| बिधि | विधाता; भाग्य ने | the ordainer; fate |
| अब | अब | now |
| सँवरी | सँवरी हुई; बन चुकी | settled favorably |
| बात | बात; कार्य | the matter; outcome |
| बिगारी | बिगाड़ दी | spoiled |
2 भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता।।
English explanation
Having heard of Parashurama's temperament, Sita experienced even half an instant as an entire cosmic age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृगुपति | भृगुवंशी परशुराम | Parashurama of Bhrigu's lineage |
| कर | का | of; possessive marker |
| सुभाउ | स्वभाव | temperament |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सीता | सीता के लिए | for Sita |
| अरध | आधा | half |
| निमेष | निमेष; पलक झपकने जितना क्षण | an instant; a blink of an eye |
| कलप | कल्प; अत्यंत लंबा ब्रह्मांडीय काल | a cosmic age |
| सम | के समान | like; equal to |
| बीता | बीता | passed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 260
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 259, 260
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।