बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाको अत्यन्त डर लगा, जिसके कारण वे उत्तर नहीं देते। यह देखकर कुटिल राजा मनमें बड़े प्रसन्न हुए। देवता, मुनि, नाग और नगरके स्त्री-पुरुष सभी सोच करने लगे, सबके हृदयमें बड़ा भय है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 260 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।
सुर मुनि नाग नगर नर नारी।।सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।
स्रोत अभिलेख 1.27 · पुस्तक पृ. 259, 260
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।
English explanation
Overcome by great fear, King Janaka gave no answer; the malicious kings rejoiced inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत अधिक | great |
| डरु | भय | fear |
| उतरु | उत्तर | an answer |
| देत | देते | giving |
| नृपु | राजा जनक | King Janaka |
| नाहीं | नहीं | not |
| कुटिल | कुटिल; दुर्भावना वाले | malicious; scheming |
| भूप | राजा | kings |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| मन | मन | their hearts |
| माहीं | के भीतर | within |
2 सुर मुनि नाग नगर नर नारी।।सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।
English explanation
Gods, sages, serpent beings, and the city's men and women all grew anxious, with deep fear in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | gods |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| नाग | नाग; सर्पजाति के दिव्य प्राणी | serpent beings |
| नगर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| सोचहिं | चिंता करते हैं | grow anxious |
| सकल | सभी | all |
| त्रास | भय | fear |
| उर | हृदय में | in their hearts |
| भारी | भारी; गहरा | great; deep |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 260
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 259, 260
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