बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।।
मूल पाठ
मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।।
कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.333 · पुस्तक पृ. 317, 318
भावार्थ
मूल पाठ के बाददस हजार सजे हुए मतवाले हाथी, जिन्हें देखकर दिशाओंके हाथी भी लजा जाते हैं, गाडिय़ोंमें भर- भरकर सोना, वस्त्र और रत्न (जवाहिरात) और भैंस, गाय तथा और भी नाना प्रकारकी चीजें दीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 318 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।।
English explanation
Ten thousand magnificent elephants in rut were adorned; seeing them, even the elephants guarding the directions felt abashed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मत्त | मदमत्त | in rut; proud and powerful |
| सहस | हजार | thousand |
| दस | दस | ten |
| सिंधुर | हाथी | elephants |
| साजे | सजाए गए | were adorned |
| जिन्हहि | जिन्हें | whom |
| देखि | देखकर | on seeing |
| दिसिकुंजर | दिशाओं के रक्षक हाथी | the mythical elephants guarding the directions |
| लाजे | लजा गए | felt abashed |
2 कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना।।
English explanation
Vehicles were filled with gold, garments, and gems; there were also buffaloes, cows, and goods of many kinds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोना | gold |
| बसन | वस्त्र | garments |
| मनि | मणियाँ; रत्न | gems |
| भरि | भरकर | filling |
| भरि | भरकर | filling fully, repeatedly |
| जाना | वाहन | vehicles; conveyances |
| महिषीं | भैंसें | female buffaloes |
| धेनु | गायें | cows |
| बस्तु | वस्तुएँ | goods |
| बिधि | प्रकार की | of kinds |
| नाना | अनेक | many different |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.333
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 318
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 318
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।