बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।।
मूल पाठ
भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।।
तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा।।
स्रोत अभिलेख 1.333 · पुस्तक पृ. 317, 318
भावार्थ
मूल पाठ के बादअनगिनत बैलों और कहारोंपर भर-भरकर (लाद-लादकर) भेजी गयी। साथ ही जनकजीने अनेकों सुन्दर शय्याएँ (पलँग) भेजीं। एक लाख घोड़े और पचीस हजार रथ सब नखसे शिखातक (ऊपरसे नीचेतक) सजाये हुए,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 318 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।।
English explanation
Janaka sent many fine supplies, fully loading bullocks and countless porters.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरि | भरकर | loading fully |
| भरि | भरकर | loading again and again |
| बसहँ | बैलों पर | on bullocks |
| अपार | असंख्य | countless |
| कहारा | कहारों; भार ढोने वालों पर | on porters; load-bearers |
| पठई | भेजीं | sent |
| जनक | सीता के पिता राजा जनक ने | King Janaka, Sita's father |
| अनेक | बहुत-सी | many |
| सुसारा | उत्तम सामग्रियाँ | fine supplies |
2 तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा।।
English explanation
There were a hundred thousand horses and twenty-five thousand chariots, all elaborately adorned from end to end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरग | घोड़े | horses |
| लाख | एक लाख | a hundred thousand |
| रथ | रथ | chariots |
| सहस | हजार | thousand |
| पचीसा | पच्चीस | twenty-five |
| सकल | सभी | all |
| सँवारे | सजाए गए | adorned |
| नख | नख; खुर | nails; hooves |
| अरु | और | and |
| सीसा | सिर | heads |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.333
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 318
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 318
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।