बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।।
मूल पाठ
भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।।
सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई।।
स्रोत अभिलेख 1.273 · पुस्तक पृ. 262, 262
भावार्थ
मूल पाठ के बादभृगुवंशी समझकर और यज्ञोपवीत देखकर तो जो कुछ आप कहते हैं, उसे मैं क्रोधको रोककर सह लेता हूँ। देवता, ब्राह्मण, भगवान्के भक्त और गौ—इनपर हमारे कुलमें वीरता नहीं दिखायी जाती॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 262 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।।
English explanation
But recognizing you as Parashurama of Bhrigu’s lineage and seeing your sacred thread, I restrain my anger and endure whatever you say.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृगुसुत | भृगुवंशी परशुराम | Parashurama, descendant of Bhrigu |
| समुझि | समझकर | recognizing you as |
| जनेउ | यज्ञोपवीत, जनेऊ | sacred thread |
| बिलोकी | देखकर | having seen |
| जो | जो | whatever |
| कछु | कुछ भी | anything |
| कहहु | आप कहते हैं | you say |
| सहउँ | मैं सहता हूँ | I endure |
| रिस | क्रोध | anger |
| रोकी | रोककर | restraining |
2 सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई।।
English explanation
In our lineage, valor is not displayed against gods, Brahmins, devotees of the Lord, or cows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | gods |
| महिसुर | ब्राह्मण | Brahmins |
| हरिजन | भगवान के भक्त | devotees of the Lord |
| अरु | और | and |
| गाई | गायें | cows |
| हमरें | हमारे | our |
| कुल | वंश में | in the lineage |
| इन्ह | इन सब | these |
| पर | के विरुद्ध | against |
| न | नहीं | not |
| सुराई | वीरता का प्रदर्शन | display of valor |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.273
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 262
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 262, 262
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।