बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभगवान् उस मायाको भौंहके इशारेपर नचाते हैं। ऐसे प्रभुको छोड़कर कहो, [और] किसका भजन किया जाय। मन, वचन और कर्मसे चतुराई छोड़कर भजते ही श्रीरघुनाथजी कृपा करेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 200 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।।
मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 199, 200
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।।
English explanation
The Lord makes that Maya dance with a mere movement of his eyebrows. Tell me, whom should one worship, abandoning such a Lord?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृकुटि | भौंहों के | of the eyebrows |
| बिलास | सहज संकेत से | with a playful movement |
| नचावइ | नचाते हैं | makes dance |
| ताही | उस माया को | that Maya |
| अस | ऐसे | such |
| प्रभु | भगवान को | the Lord |
| छाड़ि | छोड़कर | abandoning |
| भजिअ | भजना चाहिए | should one worship |
| कहु | कहो | tell me |
| काही | किसे | whom |
2 मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई।।
English explanation
When one worships, abandoning cleverness in thought, deed, and speech, Rama, king of the Raghu lineage, will show grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन में | in thought |
| क्रम | कर्म में | in deed |
| बचन | वचन में | in speech |
| छाड़ि | छोड़कर | abandoning |
| चतुराई | चालाकी | cleverness |
| भजत | भजन करने पर | upon worshipping |
| कृपा | कृपा | grace |
| करिहहिं | करेंगे | will bestow |
| रघुराई | रघुवंश के राजा राम | Rama, king of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 200
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 199, 200
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।