बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।।
मूल पाठ
एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।।
लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालनें घालि झुलावै।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 199, 200
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकारसे प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने बालक्रीड़ा की और समस्त नगरनिवासियोंको सुख दिया। कौसल्याजी कभी उन्हें गोदमें लेकर हिलाती-डुलाती और कभी पालनेमें लिटाकर झुलाती थीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 200 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।।
English explanation
In this way the Lord engaged in infant play and gave joy to all the city's residents.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| सिसुबिनोद | शिशु की क्रीड़ाएँ | infant play |
| प्रभु | भगवान राम ने | Lord Rama |
| कीन्हा | कीं | performed |
| सकल | सभी | all |
| नगरबासिन्ह | नगरवासियों को | to the city's residents |
| सुख | सुख | joy |
| दीन्हा | दिया | gave |
2 लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालनें घालि झुलावै।।
English explanation
Kaushalya sometimes takes Rama into her lap and gently rocks him, and sometimes places him in the cradle and swings it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लै | लेकर | taking |
| उछंग | गोद में | into her lap |
| कबहुँक | कभी | sometimes |
| हलरावै | हिलाती-दुलराती हैं | gently rocks |
| कबहुँ | कभी | sometimes |
| पालनें | पालने में | in the cradle |
| घालि | रखकर | placing |
| झुलावै | झुलाती हैं | swings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 200
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 199, 200
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।