बालकाण्ड · दोहा 200 · दोहा/सोरठा
प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।
प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।200।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 199, 200
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।
प्रेम में मग्न कौसल्या को रात-दिन बीतने का पता नहीं चलता।
English explanation
Absorbed in love, Kaushalya is unaware of the passing of nights and days.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| कौसल्या | राम की माता कौसल्या | Kaushalya, Rama's mother |
| निसि | रात | night |
| दिन | दिन | day |
| जात | बीतते हुए | passing |
| न | नहीं | not |
| जान | जानतीं | notices |
2 सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।200।।
पुत्र के स्नेह के वश में माता कौसल्या उसके बालचरित का गान करती हैं।
English explanation
Under the sway of love for her son, Mother Kaushalya sings of his childhood deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र के | for her son |
| सनेह | स्नेह के | of affection |
| बस | वश में | under the sway |
| माता | माता कौसल्या | Mother Kaushalya |
| बालचरित | बाल्यकाल की लीलाओं का | of childhood deeds |
| कर | करती हैं | performs |
| गान | गान | singing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 200
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 199, 200
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