बालकाण्ड · दोहा 199 · दोहा/सोरठा
सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत।
सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत।
दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत।।199।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.199 · पुस्तक पृ. 198, 199
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत।
वे सुख के समुच्चय, मोह से परे और ज्ञान, वाणी तथा इंद्रियों की पहुँच से परे हैं।
English explanation
He is the plenitude of bliss, beyond delusion and beyond the reach of knowledge, speech, and the senses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख या आनंद का | of happiness or bliss |
| संदोह | समुच्चय या भंडार | plenitude or abundance |
| मोहपर | मोह से परे | beyond delusion |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| गिरा | वाणी | speech |
| गोतीत | इंद्रियों से परे | beyond the senses |
2 दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत।।199।।
फिर भी माता-पिता के परम प्रेम के वश होकर वे पवित्र बाल-लीलाएँ करते हैं।
English explanation
Yet, moved by his parents' supreme love, he performs holy acts of childhood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दंपति | माता-पिता, वह दंपति | the couple, his parents |
| परम | परम या अत्यंत गहरे | supreme or profound |
| प्रेम | प्रेम के | of love |
| बस | वश होकर | under the sway |
| कर | करते हैं | performs |
| सिसुचरित | शिशु की लीलाएँ | acts of childhood |
| पुनीत | पवित्र | holy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 199
- स्रोत अभिलेख
- 1.199
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 198, 199
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