बालकाण्ड · दोहा 198 · दोहा/सोरठा
ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद।
ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद।
सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद।।198।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.198 · पुस्तक पृ. 197, 198
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद।
जो सर्वव्यापक ब्रह्म, निर्मल, निर्गुण और क्रीड़ा से परे हैं—
English explanation
The all-pervading Brahman, stainless, beyond qualities, and beyond play—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापक | सर्वव्यापक | all-pervading |
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| निरंजन | निर्मल; कलंक से रहित | stainless; untainted |
| निर्गुन | गुणों से परे | beyond qualities |
| बिगत | रहित; परे | free from; beyond |
| बिनोद | क्रीड़ा; मनोरंजन | play; diversion |
2 सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद।।198।।
वही अजन्मा प्रभु प्रेम और भक्ति के वश होकर कौसल्या की गोद में हैं।
English explanation
That same unborn Lord, yielding to love and devotion, is in Kausalya’s lap.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that same one |
| अज | अजन्मा | unborn |
| प्रेम | प्रेम | love |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बस | के वश में | under the sway of |
| कौसल्या | राम की माता कौसल्या | Kausalya, Rama’s mother |
| के | की | of; belonging to |
| गोद | गोद में | in the lap |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 198
- स्रोत अभिलेख
- 1.198
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 197, 198
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।