बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।।
मूल पाठ
रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।।
जीव चराचर बस कै राखे। सो माया प्रभु सों भय भाखे।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 199, 200
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीसे विमुख रहकर मनुष्य चाहे करोड़ों उपाय करे, परन्तु उसका संसारबन्धन कौन छुड़ा सकता है। जिसने सब चराचर जीवोंको अपने वशमें कर रखा है, वह माया भी प्रभुसे भय खाती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 199 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।।
English explanation
Turning away from Rama, who can break the bonds of worldly existence, even with millions of efforts?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | भगवान राम से | from Lord Rama |
| बिमुख | विमुख होकर | turned away |
| जतन | प्रयत्न | efforts |
| कर | करके | having made |
| कोरी | करोड़ों | millions |
| कवन | कौन | who |
| सकइ | सकता है | can |
| भव | संसार के | of worldly existence |
| बंधन | बंधन | bonds |
| छोरी | छुड़ा | release |
2 जीव चराचर बस कै राखे। सो माया प्रभु सों भय भाखे।।
English explanation
The Maya that keeps all moving and unmoving beings under its control expresses fear before the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीव | जीवों को | living beings |
| चराचर | चलने वाले और स्थिर | moving and unmoving |
| बस | वश में | under control |
| कै | करके | having brought |
| राखे | रखती है | keeps |
| सो | वही | that very |
| माया | माया | the power of illusion |
| प्रभु | भगवान | the Lord |
| सों | के प्रति | toward |
| भय | भय | fear |
| भाखे | व्यक्त करती है | expresses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 199
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 199, 200
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