बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा।।
मूल पाठ
भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा।।
डगइ न संभु सरासन कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें।।
स्रोत अभिलेख 1.251 · पुस्तक पृ. 244, 245
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब दस हजार राजा एक ही बार धनुषको उठाने लगे, तो भी वह उनके टाले नहीं टलता। शिवजीका वह धनुष कैसे नहीं डिगता था, जैसे कामी पुरुषके वचनोंसे सतीका मन (कभी) चलायमान नहीं होता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 244 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा।।
English explanation
Ten thousand kings together tried to lift the bow, but it would not budge despite their efforts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा | kings |
| सहस | हजार | thousand |
| दस | दस | ten |
| एकहि | एक ही | one and the same |
| बारा | बार; अवसर पर | time; occasion |
| लगे | लग गए | began |
| उठावन | उठाने | to lift |
| टरइ | हटता है; खिसकता है | moves; budges |
| न | नहीं | not |
| टारा | हटाने पर भी | even when pushed to move |
2 डगइ न संभु सरासन कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें।।
English explanation
How could Shiva’s bow be shaken? It remained firm, just as a chaste woman’s resolve is not shaken by a lustful man’s words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| डगइ | डिगता; हिलता है | wavers; moves |
| न | नहीं | not |
| संभु | शिव का | of Shiva |
| सरासन | धनुष | bow |
| कैसें | कैसे | how |
| कामी | कामासक्त पुरुष के | of a lustful man |
| बचन | वचनों से | by words |
| सती | पतिव्रता स्त्री का | of a chaste, faithful woman |
| मनु | मन | mind; resolve |
| जैसें | जैसे | just as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.251
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 244
- सहायक विषय
- राजाओंसे धनुष न उठना, जनककी निराशाजनक वाणी
- मुद्रित पृष्ठ
- 244, 245
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।