बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु बिराग संन्यासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब राजा उपहासके योग्य हो गये। जैसे वैराग्यके बिना संन्यासी उपहासके योग्य हो जाता है। कीॢत, विजय, बड़ी वीरता—इन सबको वे धनुषके हाथों बरबस हारकर चले गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 244 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु बिराग संन्यासी।।
कीरति बिजय बीरता भारी। चले चाप कर बरबस हारी।।
स्रोत अभिलेख 1.251 · पुस्तक पृ. 244, 245
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु बिराग संन्यासी।।
English explanation
All the kings became objects of ridicule, like a renunciant who lacks detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| नृप | राजा | kings |
| भए | हो गए | became |
| जोगु | योग्य | fit for; deserving of |
| उपहासी | उपहास के | ridicule |
| जैसें | जैसे | like |
| बिनु | बिना | without |
| बिराग | वैराग्य | detachment from worldly desires |
| संन्यासी | संन्यास लेने वाला | a renunciant |
2 कीरति बिजय बीरता भारी। चले चाप कर बरबस हारी।।
English explanation
They departed, having helplessly lost their fame, triumph, and great prowess at the hands of the bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीरति | यश; कीर्ति | fame |
| बिजय | विजय | victory; triumph |
| बीरता | वीरता | valor; prowess |
| भारी | बड़ी; प्रबल | great; mighty |
| चले | चल दिए | departed |
| चाप | धनुष के | of the bow |
| कर | हाथों | at the hands |
| बरबस | विवश होकर | helplessly; against their will |
| हारी | हारकर; गँवाकर | having lost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.251
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 244
- सहायक विषय
- राजाओंसे धनुष न उठना, जनककी निराशाजनक वाणी
- मुद्रित पृष्ठ
- 244, 245
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।