बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रीहत भए हारि हियँ राजा। बैठे निज निज जाइ समाजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजालोग हृदयसे हारकर श्रीहीन (हतप्रभ) हो गये और अपने-अपने समाजमें जा बैठे। राजाओंको (असफल) देखकर जनक अकुला उठे और ऐसे वचन बोले जो मानो क्रोधमें सने हुए थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 244 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
श्रीहत भए हारि हियँ राजा। बैठे निज निज जाइ समाजा।।
नृपन्ह बिलोकि जनकु अकुलाने। बोले बचन रोष जनु साने।।
स्रोत अभिलेख 1.251 · पुस्तक पृ. 244, 245
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 श्रीहत भए हारि हियँ राजा। बैठे निज निज जाइ समाजा।।
English explanation
Disheartened, the kings lost their splendor and went back to sit among their respective companies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीहत | शोभा और तेज से रहित | bereft of splendor |
| भए | हो गए | became |
| हारि | हारकर | having lost heart |
| हियँ | हृदय में; मन से | in their hearts |
| राजा | राजा | the kings |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | respective |
| जाइ | जाकर | having gone |
| समाजा | मंडली में | among their companies |
2 नृपन्ह बिलोकि जनकु अकुलाने। बोले बचन रोष जनु साने।।
English explanation
Seeing the kings, Janaka grew distressed and spoke words that seemed steeped in anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृपन्ह | राजाओं को | the kings |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| जनकु | सीता के पिता राजा जनक | King Janaka, Sita’s father |
| अकुलाने | व्याकुल हो गए | grew distressed |
| बोले | बोले | spoke |
| बचन | वचन | words |
| रोष | क्रोध में | in anger |
| जनु | मानो | as though |
| साने | सने हुए | steeped; imbued |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.251
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 244
- सहायक विषय
- राजाओंसे धनुष न उठना, जनककी निराशाजनक वाणी
- मुद्रित पृष्ठ
- 244, 245
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।