बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभले और बुरे अपनी-अपनी करनीके अनुसार सुन्दर यश और अपयशकी सम्पत्ति पाते हैं। अमृत, चन्द्रमा, गङ्गाजी और साधु एवं विष, अग्नि, कलियुगके पापोंकी नदी अर्थात् कर्मनाशा और हिंसा करनेवाला व्याध, इनके गुण-अवगुण सब कोई जानते हैं; किन्तु जिसे जो भाता है, उसे वही अच्छा लगता है॥ ४-५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 25 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।
सुधा सुधाकर सुरसरि साधू। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।।
गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।
स्रोत अभिलेख 1.5 · पुस्तक पृ. 24, 25
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।
English explanation
The good and the bad obtain the wealth of good repute and [probably ill repute] according to their respective deeds; the reading ‘अपलोक’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भल | भले लोग | good people |
| अनभल | बुरे लोग | bad people |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | respective |
| करतूती | कर्मों से | through deeds |
| लहत | पाते हैं | obtain |
| सुजस | अच्छी कीर्ति | good repute |
| अपलोक | अपयश; लोकनिंदा। | Ill repute; public disgrace. |
| बिभूती | संपदा | wealth |
2 सुधा सुधाकर सुरसरि साधू। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।।
English explanation
Saints are like nectar, the moon, and the Ganges; the wicked are like poison, fire, and a river of the impurities of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| सुधाकर | चंद्रमा | the moon |
| सुरसरि | गंगा | the Ganges |
| साधू | संत | saints |
| गरल | विष | poison |
| अनल | अग्नि | fire |
| कलिमल | कलियुग के पापों की | of the impurities of the age of Kali |
| सरि | नदी | river |
| ब्याधू | दुर्जन | the wicked |
3 गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।
English explanation
Everyone knows virtues and faults; nevertheless, whatever appeals to someone seems good to that person.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुन | गुण | virtues |
| अवगुन | दोष | faults |
| जानत | जानता है | knows |
| सब | हर | every |
| कोई | व्यक्ति | person |
| जो | जो वस्तु या स्वभाव | whatever thing or nature |
| जेहि | जिसे | to whom |
| भाव | भाता है | appeals |
| नीक | अच्छा | good |
| तेहि | उसे | to that person |
| सोई | वही | that very thing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 25
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 24, 25
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।