बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददोनों (संत और असंत) जगत्में एक साथ पैदा होते हैं; पर [एक साथ पैदा होनेवाले] कमल और जोंककी तरह उनके गुण अलग-अलग होते हैं। (कमल दर्शन और स्पर्शसे सुख देता है, किन्तु जोंक शरीरका स्पर्श पाते ही रक्त चूसने लगती है।) साधु अमृतके समान (मृत्युरूपी संसारसे उबारनेवाला) और असाधु मदिराके समान (मोह,प्रमाद और जड़ता उत्पन्न करनेवाला) है, दोनोंको उत्पन्न करनेवाला जगद्रूपी अगाध समुद्र एक ही है। [शास्त्रोंमें समुद्रमन्थनसे ही अमृत और मदिरा दोनोंकी उत्पत्ति बतायी गयी है]॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 24 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।।
सुधा सुरा सम साधू असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।।
स्रोत अभिलेख 1.5 · पुस्तक पृ. 24, 25
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।।
English explanation
Both arise together in the world, yet their qualities differ, like those of a lotus and a leech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपजहिं | उत्पन्न होते हैं | arise |
| एक | एक ही | the same |
| संग | साथ | together |
| जग | संसार | world |
| माहीं | में | in |
| जलज | कमल | lotus |
| जोंक | जोंक | leech |
| जिमि | जैसे | like |
| गुन | गुण या स्वभाव | qualities or natures |
| बिलगाहीं | भिन्न हैं | differ |
2 सुधा सुरा सम साधू असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।।
English explanation
The good and the wicked are like nectar and liquor; they share one source—the unfathomable ocean of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| सुरा | मदिरा | liquor |
| सम | के समान | like |
| साधू | सज्जन | the good |
| असाधू | दुर्जन | the wicked |
| जनक | जन्मदाता या उत्पत्ति का स्रोत | parent or source |
| एक | एक ही | one and the same |
| जग | संसाररूपी | in the form of the world |
| जलधि | समुद्र | ocean |
| अगाधू | अथाह | unfathomable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 24
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 24, 25
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।