बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।
मूल पाठ
बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।
बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.5 · पुस्तक पृ. 24, 25
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब मैं संत और असंत दोनोंके चरणोंकी वन्दना करता हूँ; दोनों ही दु:ख देनेवाले हैं, परन्तु उनमें कुछ अन्तर कहा गया है। वह अन्तर यह है कि एक (संत) तो बिछुड़ते समय प्राण हर लेते हैं और दूसरे (असंत) मिलते हैं तब दारुण दु:ख देते हैं। (अर्थात् संतोंका बिछुडऩा मरनेके समान दु:खदायी होता है और असंतोंका मिलना)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 24 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।
English explanation
I bow to the feet of saints and wicked people. Both cause sorrow, but there is a distinction between them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं वंदना करता हूँ | I bow to |
| संत | संतों के | of saints |
| असज्जन | दुर्जनों के | of wicked people |
| चरना | चरण | feet |
| दुखप्रद | दुःख देने वाले | causing sorrow |
| उभय | दोनों | both |
| बीच | के बीच | between them |
| कछु | कुछ | some |
| बरना | भेद | distinction |
2 बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं।।
English explanation
One group—the saints—takes one's life away through separation; the other—the wicked—causes terrible suffering upon meeting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिछुरत | बिछुड़ने पर | upon separation |
| एक | एक वर्ग, संत | one group, the saints |
| प्रान | प्राण | life |
| हरि | हर | taking away |
| लेहीं | लेते हैं | take |
| मिलत | मिलने पर | upon meeting |
| एक | दूसरा वर्ग, दुर्जन | the other group, the wicked |
| दुख | दुःख | suffering |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| देहीं | देते हैं | give |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 24
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 24, 25
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।