बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरद्वाज सुनि संकर बानी। सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी।।
मूल पाठ
भरद्वाज सुनि संकर बानी। सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी।।
लगे बहुरि बरने बृषकेतू। सो अवतार भयउ जेहि हेतू।।
स्रोत अभिलेख 1.141 · पुस्तक पृ. 149, 150
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[याज्ञवल्क्यजीने कहा—] हे भरद्वाज! शङ्करजीके वचन सुनकर पार्वतीजी सकुचाकर प्रेमसहित मुसकरायीं। फिर वृषकेतु शिवजी जिस कारणसे भगवान्का वह अवतार हुआ था, उसका वर्णन करने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 150 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरद्वाज सुनि संकर बानी। सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी।।
English explanation
O Bharadvaja, hearing Shiva’s words, Uma smiled with bashfulness and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरद्वाज | हे ऋषि भरद्वाज | O sage Bharadvaja |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| संकर | शंकर के; शिव के | Shiva’s |
| बानी | वचन | words |
| सकुचि | संकोच करके | with bashfulness |
| सप्रेम | प्रेम सहित | with affection |
| उमा | उमा; पार्वती | Uma, Parvati |
| मुसकानी | मुस्कुराईं | smiled |
2 लगे बहुरि बरने बृषकेतू। सो अवतार भयउ जेहि हेतू।।
English explanation
Then Shiva, whose banner bears the bull, began describing the reason for that incarnation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लगे | लगे; आरंभ किया | began |
| बहुरि | फिर | again; then |
| बरने | वर्णन करने | to describe |
| बृषकेतू | वृषभध्वज शिव | Shiva, whose banner bears the bull |
| सो | वह | that |
| अवतार | अवतार | incarnation |
| भयउ | हुआ | occurred |
| जेहि | जिस | which |
| हेतू | कारण से | for the reason |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.141
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 150
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 149, 150
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।