बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी। तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअब भी तुम्हारे उस बावलेपनकी छाया नहीं मिटती, उन्हींके भ्रमरूपी रोगके हरण करनेवाले चरित्र सुनो। उस अवतारमें भगवान्ने जो-जो लीला की, वह सब मैं अपनी बुद्धिके अनुसार तुम्हें कहूँगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 149 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी। तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी।।
लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा। सो सब कहिहउँ मति अनुसारा।।
स्रोत अभिलेख 1.141 · पुस्तक पृ. 149, 150
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी। तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी।।
English explanation
Even now the shadow of your bewilderment has not faded. Hear his deeds, which remove the disease of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजहुँ | अब भी | even now |
| न | नहीं | not |
| छाया | भ्रम की छाया | shadow of bewilderment |
| मिटति | मिटती है | fades; disappears |
| तुम्हारी | तुम्हारी | your |
| तासु | उन्हीं के | his |
| चरित | चरित्र; लीलाएँ | deeds |
| सुनु | सुनो | listen to |
| भ्रम | भ्रमरूपी | of delusion |
| रुज | रोग | disease |
| हारी | दूर करने वाला | removing |
2 लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा। सो सब कहिहउँ मति अनुसारा।।
English explanation
I shall recount, according to my understanding, all the deeds he performed in that incarnation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लीला | लीलाएँ | divine deeds |
| कीन्हि | कीं | performed |
| जो | जो | which |
| तेहिं | उस | that |
| अवतारा | अवतार में | in the incarnation |
| सो | वे | those |
| सब | सब | all |
| कहिहउँ | मैं कहूँगा | I shall recount |
| मति | अपनी बुद्धि | my understanding |
| अनुसारा | के अनुसार | according to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.141
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 149
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 149, 150
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।