बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा।।
मूल पाठ
जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा।।
जासु चरित अवलोकि भवानी। सती सरीर रहिहु बौरानी।।
स्रोत अभिलेख 1.141 · पुस्तक पृ. 149, 150
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन प्रभु श्रीरामचन्द्रजीको तुमने भाई लक्ष्मणजीके साथ मुनियोंका-सा वेष धारण किये वनमें फिरते देखा था और हे भवानी! जिनके चरित्र देखकर सतीके शरीरमें तुम ऐसी बावली हो गयी थीं कि—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 149 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा।।
English explanation
That Lord whom you saw wandering in the forest with his brother, wearing an ascetic’s garb.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिन्हें | whom |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| फिरत | घूमते हुए | wandering |
| तुम्ह | तुमने | you |
| देखा | देखा था | saw |
| बंधु | भाई लक्ष्मण | his brother Lakshmana |
| समेत | के साथ | together with |
| धरें | धारण किए हुए | wearing |
| मुनिबेषा | मुनि का वेश | an ascetic’s garb |
2 जासु चरित अवलोकि भवानी। सती सरीर रहिहु बौरानी।।
English explanation
O Bhavani, on seeing whose deeds you became bewildered when you were in Sati’s body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनके | whose |
| चरित | चरित्र; आचरण | deeds; conduct |
| अवलोकि | देखकर | having seen |
| भवानी | हे पार्वती | O Parvati |
| सती | सती के | of Sati |
| सरीर | शरीर में | in the body |
| रहिहु | तुम हो गई थीं | you had become |
| बौरानी | भ्रमित; बावली | bewildered; distraught |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.141
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 149
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 149, 150
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।