बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।।
मूल पाठ
भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।।
गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा।।
स्रोत अभिलेख 1.313 · पुस्तक पृ. 294, 294
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उन्होंने जाकर विनती की—] समय हो गया, अब पधारिये। यह सुनते ही नगाड़ोंपर चोट पड़ी। गुरु वसिष्ठजीसे पूछकर और कुलकी सब रीतियोंको करके राजा दशरथजी मुनियों और साधुओंके समाजको साथ लेकर चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 294 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।।
English explanation
“The time has come; please proceed now.” Hearing this, the kettledrums were struck and sounded.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया | has come |
| समउ | समय | the time |
| अब | अब | now |
| धारिअ | रखिए | please place |
| पाऊ | चरण | your feet |
| यह | यह | this |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| परा | पड़ी | fell |
| निसानहिं | नगाड़ों पर | upon the kettledrums |
| घाऊ | चोट | a striking blow |
2 गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा।।
English explanation
After consulting his guru and performing the family rites, King Dasharatha set out with a company of sages and holy men.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरहि | गुरु से | his guru |
| पूछि | पूछकर, अनुमति लेकर | having consulted and obtained permission |
| करि | करके | having performed |
| कुल | कुल की | of the family |
| बिधि | रीति और अनुष्ठान | customary rites |
| राजा | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| चले | चले | set out |
| संग | साथ | with |
| मुनि | मुनियों का | of sages |
| साधु | साधुओं का | of holy men |
| समाजा | समुदाय | company |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.313
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 294
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 294, 294
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।