बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुनि और देवतारूपी चकवे शोकरहित हो गये। वे फूल बरसाकर अपनी सेवा प्रकट कर रहे हैं। प्रेमसहित गुरुके चरणोंकी वन्दना करके श्रीरामचन्द्रजीने मुनियोंसे आज्ञा माँगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 247 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।
गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा।।
स्रोत अभिलेख 1.255 · पुस्तक पृ. 247, 248
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।
English explanation
The sages and gods, likened to ruddy shelducks, became free of sorrow; they shower flowers and express their devotion through service.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| बिसोक | शोक से रहित | free of sorrow |
| कोक | चकवे | ruddy shelducks |
| मुनि | मुनि | sages |
| देवा | देवता | gods |
| बरिसहिं | बरसाते हैं | shower |
| सुमन | फूल | flowers |
| जनावहिं | प्रकट करते हैं | express |
| सेवा | सेवा-भाव | devoted service |
2 गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा।।
English explanation
Having reverently bowed at his guru’s feet with affection, Rama asked the sages for permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु के | of the guru |
| पद | चरण | feet |
| बंदि | वंदना करके | having bowed reverently |
| सहित | सहित | with |
| अनुरागा | प्रेम | affection |
| राम | श्रीराम | Rama |
| मुनिन्ह | मुनियों | the sages |
| सन | से | from |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| मागा | माँगी | asked for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.255
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 247
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 247, 248
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।