बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।
मूल पाठ
सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।
चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी।।
स्रोत अभिलेख 1.255 · पुस्तक पृ. 247, 248
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमस्त जगत्के स्वामी श्रीरामजी सुन्दर मतवाले श्रेष्ठ हाथीकी-सी चालसे स्वाभाविक ही चले। श्रीरामचन्द्रजीके चलते ही नगरभरके सब स्त्री-पुरुष सुखी हो गये और उनके शरीर रोमाञ्चसे भर गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 247 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।
English explanation
The lord of the entire world walked with natural ease, with the graceful gait of a magnificent elephant in musth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहजहिं | सहज ही, बिना प्रयास | with natural ease |
| चले | चले | walked |
| सकल | समस्त | entire |
| जग | जगत | world |
| स्वामी | स्वामी | lord |
| मत्त | मदमस्त | in musth |
| मंजु | सुंदर | graceful |
| बर | श्रेष्ठ | magnificent |
| कुंजर | हाथी | elephant |
| गामी | वैसी चाल वाले | having such a gait |
2 चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी।।
English explanation
As Rama walked, all the men and women of the city became joyful, their bodies covered in goosebumps of delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलत | चलते समय | as he walked |
| राम | राम | Rama |
| सब | सभी | all |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| पुलक | आनंद का रोमांच | goosebumps of delight |
| पूरि | भरकर | filling |
| तन | शरीर | bodies |
| भए | हो गए | became |
| सुखारी | सुखी, आनंदित | happy, joyful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.255
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 247
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 247, 248
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।