बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।
मूल पाठ
बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।
तौ सिवधनु मृनाल की नाईं। तोरहुँ राम गनेस गोसाईं।।
स्रोत अभिलेख 1.255 · पुस्तक पृ. 247, 248
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने पितर और देवताओंकी वन्दना करके अपने पुण्योंका स्मरण किया। यदि हमारे पुण्योंका कुछ भी प्रभाव हो, तो हे गणेश गोसाईं! रामचन्द्रजी शिवजीके धनुषको कमलकी डंडीकी भाँति तोड़ डालें॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 247 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।
English explanation
They bowed to their ancestors and the gods, recalled their good deeds, and prayed: If our accumulated merit has any power…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed |
| पितर | पितरों को | to the ancestors |
| सुर | देवताओं को | to the gods |
| सुकृत | शुभ कर्म | meritorious deeds |
| सँभारे | स्मरण किए | recalled |
| जौं | यदि | if |
| कछु | कुछ भी | any |
| पुन्य | पुण्य का | of merit |
| प्रभाउ | प्रभाव | power |
| हमारे | हमारे | our |
2 तौ सिवधनु मृनाल की नाईं। तोरहुँ राम गनेस गोसाईं।।
English explanation
Then, O Lord Ganesha, grant that Rama break Shiva’s bow as easily as a lotus stalk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| सिवधनु | शिव का धनुष | Shiva’s bow |
| मृनाल | कमल की डंडी | lotus stalk |
| की | के | of |
| नाईं | समान | like |
| तोरहुँ | तुड़वा दीजिए | grant that it be broken |
| राम | राम से | by Rama |
| गनेस | हे गणेश | O Ganesha, remover of obstacles |
| गोसाईं | हे प्रभु | O Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.255
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 247
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 247, 248
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।