बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दएक बार ब्रह्माकी सभामें हमसे अप्रसन्न हो गये थे, उसीसे वे अब भी हमारा अपमान करते हैं। हे भवानी! जो तुम बिना बुलाये जाओगी तो न शील-स्नेह ही रहेगा और न मान-मर्यादा ही रहेगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 81 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना।।
जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी।।
स्रोत अभिलेख 1.62 · पुस्तक पृ. 81, 82
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना।।
English explanation
In Brahma’s assembly, Daksha took offense at me; for that reason he still dishonors me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मसभाँ | ब्रह्मा की सभा में | in Brahma’s assembly |
| हम | मुझ | me |
| सन | से | at; from |
| दुखु | दुख; बुरा लगना | hurt; offense |
| माना | माना; अनुभव किया | felt; took |
| तेहि | उसी बात | that very incident |
| तें | के कारण | because of |
| अजहुँ | अब भी | even now |
| करहिं | करते हैं | he does |
| अपमाना | अपमान | dishonor |
2जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी।।
English explanation
O Bhavani, if you go uninvited, neither propriety, affection, nor regard will remain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| बिनु | बिना | without |
| बोलें | बुलाए जाने के | being invited |
| जाहु | तुम जाओ | you go |
| भवानी | हे भवानी, शिव की पत्नी सती | O Bhavani, Sati, Shiva’s wife |
| रहइ | रहेगा | will remain |
| न | नहीं | not |
| सीलु | शील; उचित आचरण | propriety; good conduct |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| न | न ही | nor |
| कानी | मान-मर्यादा; लिहाज | regard; respectful consideration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 81
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 81, 82
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।