बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत पठावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशिवजीने कहा—तुमने बात तो अच्छी कही, यह मेरे मनको भी पसंद आयी। पर उन्होंने न्योता नहीं भेजा, यह अनुचित है। दक्षने अपनी सब लड़कियोंको बुलाया है; किन्तु हमारे वैरके कारण उन्होंने तुमको भी भुला दिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 81 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत पठावा।।
दच्छ सकल निज सुता बोलाई। हमरें बयर तुम्हउ बिसराई।।
स्रोत अभिलेख 1.62 · पुस्तक पृ. 81, 82
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत पठावा।।
English explanation
You have spoken well; the idea pleases me too. But it is improper that Daksha sent no invitation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेहु | तुमने कहा | you have said |
| नीक | ठीक; अच्छा | well; rightly |
| मोरेहुँ | मेरे भी | my … too |
| मन | मन को | to the mind |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
| यह | यह बात | this fact |
| अनुचित | अनुचित है | is improper |
| नहिं | नहीं | not |
| नेवत | निमंत्रण | an invitation |
| पठावा | भेजा | sent |
2दच्छ सकल निज सुता बोलाई। हमरें बयर तुम्हउ बिसराई।।
English explanation
Daksha invited all his daughters, but because of his hostility toward me, he left you out too.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दच्छ | दक्ष, सती के पिता | Daksha, Sati’s father |
| सकल | सभी | all |
| निज | अपनी | his own |
| सुता | बेटियों को | daughters |
| बोलाई | बुलाया | invited |
| हमरें | मेरे साथ | toward me |
| बयर | वैर के कारण | because of hostility |
| तुम्हउ | तुम्हें भी | you too |
| बिसराई | भुला दिया; नहीं बुलाया | left out; did not invite |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 81
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 81, 82
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।