बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।।
मूल पाठ
बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।।
सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।।
स्रोत अभिलेख 1.136 · पुस्तक पृ. 145, 146
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवताओंके स्वामी भगवान्ने मीठी वाणीमें कहा—हे मुनि! व्याकुलकी तरह कहाँ चले ? ये शब्द सुनते ही नारदको बड़ा क्रोध आया; मायाके वशीभूत होनेके कारण मनमें चेत नहीं रहा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 145 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।।
English explanation
Vishnu, lord of the gods, spoke gently: ‘Sage, where are you going, like someone distraught?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | कहा | spoke |
| मधुर | मीठे | gentle |
| बचन | वचन | words |
| सुरसाईं | देवताओं के स्वामी विष्णु | Vishnu, lord of the gods |
| मुनि | हे मुनि नारद | O sage Narada |
| कहँ | कहाँ | where |
| चले | जा रहे हैं | are you going |
| बिकल | व्याकुल व्यक्ति | a distraught person |
| की | के | of |
| नाईं | समान | in the manner of |
2 सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।।
English explanation
Hearing these words, Narada became intensely angry. Under the sway of illusion, his mind retained no discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| बचन | वचन | the words |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| अति | बहुत | intense |
| क्रोधा | क्रोध | anger |
| माया | माया; मोहकारी शक्ति | illusion; deluding power |
| बस | के वश में | under the sway of |
| न | नहीं | not |
| रहा | रहा | remained |
| मन | मन में | in the mind |
| बोधा | विवेक; समझ | discernment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.136
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 145
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 145, 146
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।