बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[मुनिने कहा—] तुम दूसरोंकी सम्पदा नहीं देख सकते, तुम्हारे ईष्र्या और कपट बहुत है। समुद्र मथते समय तुमने शिवजीको बावला बना दिया और देवताओंको प्रेरित करके उन्हें विषपान कराया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 145 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।।
मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।
स्रोत अभिलेख 1.136 · पुस्तक पृ. 145, 146
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।।
English explanation
Narada accuses him: ‘You cannot bear to see others prosper. Jealousy and deceit are especially strong in you.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों की | others’ |
| संपदा | संपन्नता; सौभाग्य | prosperity; good fortune |
| सकहु | तुम कर सकते हो | you can |
| नहिं | नहीं | not |
| देखी | देखना; सहन करना | bear to see |
| तुम्हरें | तुममें | in you |
| इरिषा | ईर्ष्या | jealousy |
| कपट | छल | deceit |
| बिसेषी | बहुत अधिक | especially strong |
2 मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।
English explanation
‘During the churning of the ocean, you drove Rudra to distraction; by prompting the gods, you had them make him drink poison.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मथत | मंथन करते समय | while churning |
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| रुद्रहि | रुद्र अर्थात शिव को | Rudra, Shiva, as the affected person |
| बौरायहु | तुमने बावला कर दिया | you drove to distraction |
| सुरन्ह | देवताओं को | the gods |
| प्रेरी | प्रेरित करके; उकसाकर | having prompted |
| बिष | विष | poison |
| पान | पीना | drinking |
| करायहु | तुमने करवाया | you caused |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.136
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 145
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 145, 146
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।