बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअत: जानकीजीके मुखकी तुझे उपमा देनेमें बड़ा अनुचित कर्म करनेका दोष लगेगा। इस प्रकार चन्द्रमाके बहाने सीताजीके मुखकी छबिका वर्णन करके, बड़ी रात हो गयी जान, वे गुरुजीके पास चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 232 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।।
सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी।।
स्रोत अभिलेख 1.238 · पुस्तक पृ. 232, 233
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।।
English explanation
To compare Sita’s face to you would be a grave fault; doing so would be most improper.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैदेही | विदेहकुमारी सीता का | of Sita, the princess of Videha |
| मुख | चेहरा | face |
| पटतर | उपमा | comparison |
| दीन्हे | देने पर | if given |
| होइ | होगा | would arise |
| दोष | दोष | fault |
| बड़ | बड़ा | great |
| अनुचित | अनुचित कार्य | an improper act |
| कीन्हे | करने पर | if done |
2 सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी।।
English explanation
Having described the beauty of Sita’s face through the pretext of the moon, Rama went to his teacher, realizing that the night was far advanced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता के | Sita’s |
| मुख | मुख की | of the face |
| छबि | शोभा | beauty |
| बिधु | चंद्रमा के | of the moon |
| ब्याज | बहाने | under the pretext |
| बखानी | वर्णन करके | having described |
| गुरु | गुरु विश्वामित्र के | of his teacher Vishvamitra |
| पहिं | पास | to |
| चले | चले गए | went |
| निसा | रात | the night |
| बड़ि | बहुत बीत चुकी | far advanced |
| जानी | जानकर | realizing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.238
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 232
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 232, 233
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।