बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।।
मूल पाठ
घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।।
कोक सिकप्रद पंकज द्रोही। अवगुन बहुत चंद्रमा तोही।।
स्रोत अभिलेख 1.238 · पुस्तक पृ. 232, 233
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर यह घटता-बढ़ता है और विरहिणी स्त्रियोंको दु:ख देनेवाला है; राहु अपनी सन्धिमें पाकर इसे ग्रस लेता है। चकवेको [चकवीके वियोगका] शोक देनेवाला और कमलका वैरी (उसे मुरझा देनेवाला) है। हे चन्द्रमा! तुझमें बहुत-से अवगुण हैं [जो सीताजीमें नहीं हैं]॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 232 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: The moon waxes and wanes and pains women separated from their beloveds; Rahu seizes his opportunity and devours it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घटइ | घटता है | wanes |
| बढ़इ | बढ़ता है | waxes |
| बिरहनि | विरहिणियों को | to women separated from their beloveds |
| दुखदाई | दुःख देने वाला | causing sorrow |
| ग्रसइ | ग्रस लेता है | devours |
| राहु | चंद्रमा को ग्रसने वाला राहु | Rahu, the eclipse-causing celestial figure |
| निज | अपना | his own |
| संधिहिं | अवसर को | opportunity |
| पाई | पाकर | having found |
2 कोक सिकप्रद पंकज द्रोही। अवगुन बहुत चंद्रमा तोही।।
English explanation
O moon, you bring sorrow to the chakravaka bird and oppose the lotus; you have many faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोक | चकवे को | to the chakravaka bird |
| सिकप्रद | शोक देने वाला | causing sorrow |
| पंकज | कमल का | of the lotus |
| द्रोही | विरोधी | enemy |
| अवगुन | दोष | faults |
| बहुत | अनेक | many |
| चंद्रमा | हे चंद्रमा | O moon |
| तोही | तुममें | in you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.238
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 232
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 232, 233
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।