बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दविषय, इन्द्रियाँ, इन्द्रियोंके देवता और जीवात्मा—ये सब एककी सहायतासे एक चेतन होते हैं। (अर्थात् विषयोंका प्रकाश इन्द्रियोंसे, इन्द्रियोंका इन्द्रियोंके देवताओंसे और इन्द्रियदेवताओंका चेतन जीवात्मासे प्रकाश होता है।) इन सबका जो परम प्रकाशक है (अर्थात् जिससे इन सबका प्रकाश होता है), वही अनादि ब्रह्म अयोध्यानरेश श्रीरामचन्द्रजी हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 129 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता।।
सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई।।
स्रोत अभिलेख 1.117 · पुस्तक पृ. 129, 130
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता।।
English explanation
Sense objects, the senses, their presiding deities, and the individual soul are successively more conscious than the preceding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषय | इंद्रियों के विषय | sense objects |
| करन | इंद्रियाँ | sense faculties |
| सुर | इंद्रियों के अधिष्ठाता देवता | presiding deities of the senses |
| जीव | व्यक्तिगत आत्मा | the individual soul |
| समेता | सहित | included |
| सकल | सभी | all |
| एक | एक, अर्थात् पूर्ववर्ती | one, the preceding |
| तें | से | than |
| एक | दूसरा, अर्थात् अगला | another, the next |
| सचेता | अधिक चेतन | more conscious |
2 सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई।।
English explanation
The supreme illuminator of them all is that same beginningless Rama, Lord of Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | इन सब | all these |
| कर | के | of |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| प्रकासक | प्रकाश और चेतना देने वाले | illuminator |
| जोई | जो हैं | the one who is |
| राम | प्रभु राम | Lord Rama |
| अनादि | जिनका कोई आरंभ नहीं | beginningless |
| अवधपति | अयोध्या के स्वामी | Lord of Ayodhya |
| सोई | वही | that very one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 129
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 129, 130
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।