बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं।।
मूल पाठ
बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं।।
नेगी नेग जोग सब लेहीं। रुचि अनुरुप भूपमनि देहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.353 · पुस्तक पृ. 333, 334
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर सब सुआसिनियोंको (नगरभरकी सौभाग्यवती बहिन, बेटी, भानजी आदिको) बुलवा लिया और उनकी रुचि समझकर [उसीके अनुसार] उन्हें पहिरावनी दी। नेगी लोग सब अपना-अपना नेग-जोग लेते और राजाओंके शिरोमणि दशरथजी उनकी इच्छाके अनुसार देते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 334 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं।।
English explanation
Then he summoned the married women and, considering their preferences, gave them gifts of attire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| बोलाइ | बुलाकर | having summoned |
| सुआसिनि | सुहागिन स्त्रियों को | women whose husbands were living |
| लीन्हीं | बुलवा लिया | had them come |
| रुचि | पसंद | preferences |
| बिचारि | विचार करके | considering |
| पहिरावनि | पहनने के उपहार | gifts of attire |
| दीन्हीं | दिए | gave |
2 नेगी नेग जोग सब लेहीं। रुचि अनुरुप भूपमनि देहीं।।
English explanation
All those entitled to ceremonial gifts receive their appropriate gifts, and the jewel among kings gives according to their preferences.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नेगी | नेग पाने के अधिकारी | those entitled to ceremonial gifts |
| नेग | प्रथागत उपहार | ceremonial gifts |
| जोग | अपने योग्य | appropriate to them |
| सब | सभी | all |
| लेहीं | लेते हैं | receive |
| रुचि | पसंद के | their preferences |
| अनुरुप | अनुसार | in accordance with |
| भूपमनि | राजाओं में श्रेष्ठ राजा | the jewel among kings |
| देहीं | देते हैं | gives |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.353
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 334
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 333, 334
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।