बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने।।
मूल पाठ
प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने।।
देव देखि रघुबीर बिबाहू। बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू।।
स्रोत अभिलेख 1.353 · पुस्तक पृ. 333, 334
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन मेहमानोंको प्रिय और पूजनीय जाना, उनका राजाने भलीभाँति सम्मान किया। देवगण श्रीरघुनाथजीका विवाह देखकर, उत्सवकी प्रशंसा करके फूल बरसाते हुए—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 334 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने।।
English explanation
The king duly honored the guests whom he regarded as dear and worthy of reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिय | प्रिय | dear |
| पाहुने | अतिथि | guests |
| पूज्य | आदर के योग्य | worthy of reverence |
| जे | जिन्हें | whom |
| जाने | समझते थे | regarded as |
| भूपति | राजा ने | the king |
| भली | अच्छी | proper |
| भाँति | रीति से | in a manner |
| सनमाने | सम्मान किया | honored |
2 देव देखि रघुबीर बिबाहू। बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू।।
English explanation
Seeing Rama’s wedding, the gods showered flowers and praised the festive rejoicing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवताओं ने | the gods |
| देखि | देखकर | having seen |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम का | of Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| बिबाहू | विवाह | wedding |
| बरषि | बरसाकर | showering |
| प्रसून | फूल | flowers |
| प्रसंसि | प्रशंसा करके | praising |
| उछाहू | उत्सव का उल्लास | the festive rejoicing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.353
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 334
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 333, 334
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।