बालकाण्ड · दोहा 353 · दोहा/सोरठा
चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ।
चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ।
कहत परसपर राम जसु प्रेम न हृदयँ समाइ।।353।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.353 · पुस्तक पृ. 333, 334
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ।
देवता नगाड़े बजाते हुए आनंद पाकर अपने-अपने नगरों की ओर चले।
English explanation
Filled with joy, the gods departed for their respective cities, sounding kettledrums.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चले | departed |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
| बजाइ | बजाकर | sounding |
| सुर | देवता | the gods |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| पुर | नगरों की ओर | to their cities |
| सुख | आनंद | joy |
| पाइ | पाकर | having gained |
2 कहत परसपर राम जसु प्रेम न हृदयँ समाइ।।353।।
वे आपस में राम का यश कहते जाते थे; उनके हृदयों में प्रेम समाता न था।
English explanation
They spoke to one another of Rama’s glory; their hearts could not contain their love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | speaking of |
| परसपर | आपस में | to one another |
| राम | राम का | Rama’s |
| जसु | यश | glory |
| प्रेम | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in their hearts |
| समाइ | समाता था | could be contained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 353
- स्रोत अभिलेख
- 1.353
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 333, 334
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।