बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता।।
मूल पाठ
उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता।।
बिप्रबधू सब भूप बोलाई। चैल चारु भूषन पहिराई।।
स्रोत अभिलेख 1.353 · पुस्तक पृ. 333, 334
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर सीताजीसहित श्रीरामचन्द्रजीको हृदयमें रखकर गुरु वसिष्ठजी हॢषत होकर अपने स्थानको गये। राजाने सब ब्राह्मणोंकी स्त्रियोंको बुलवाया और उन्हें सुन्दर वस्त्र तथा आभूषण पहनाये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 334 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता।।
English explanation
Holding Rama together with Sita in his heart, the preceptor joyfully departed for his abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | हृदय में | in his heart |
| धरि | धारण करके | holding |
| रामहि | राम को | Rama |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s bride |
| समेता | सहित | together with |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| कीन्ह | किया | undertook |
| गुर | गुरु ने | the preceptor |
| गवनु | प्रस्थान | departure |
| निकेता | अपने निवास की ओर | for his abode |
2 बिप्रबधू सब भूप बोलाई। चैल चारु भूषन पहिराई।।
English explanation
The king summoned all the Brahmins’ wives and had them adorned with fine garments and ornaments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रबधू | ब्राह्मणों की पत्नियों को | the Brahmins’ wives |
| सब | सभी | all |
| भूप | राजा ने | the king |
| बोलाई | बुलाकर | having summoned |
| चैल | वस्त्र | garments |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| पहिराई | पहनाए | had them adorned with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.353
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 334
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 333, 334
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।