बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें।।
मूल पाठ
बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें।।
नेगु मागि मुनिनायक लीन्हा। आसिरबादु बहुत बिधि दीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.353 · पुस्तक पृ. 333, 334
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने अत्यन्त प्रेमपूर्ण हृदयसे पुत्रोंको और सारी सम्पत्तिको सामने रखकर [उन्हें स्वीकार करनेके लिये] विनती की। परन्तु मुनिराजने [पुरोहितके नाते] केवल अपना नेग माँग लिया और बहुत तरहसे आशीर्वाद दिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 333 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें।।
English explanation
With deep love in his heart, the king made a humble appeal, placing his sons and all his wealth before the sage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनय | विनती | humble appeal |
| कीन्हि | की | made |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अति | अत्यंत | deeply |
| अनुरागें | प्रेम के साथ | with affection |
| सुत | पुत्रों को | his sons |
| संपदा | धन-संपत्ति को | his wealth |
| राखि | रखकर | having placed |
| सब | सब | all |
| आगें | सामने | before the sage |
2 नेगु मागि मुनिनायक लीन्हा। आसिरबादु बहुत बिधि दीन्हा।।
English explanation
The chief of sages asked for and accepted a ceremonial gift, and bestowed blessings in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नेगु | अवसर का उपहार | ceremonial gift |
| मागि | माँगकर | having requested |
| मुनिनायक | मुनियों के प्रमुख | the chief of sages |
| लीन्हा | लिया | accepted |
| आसिरबादु | आशीर्वाद | blessings |
| बहुत | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| दीन्हा | दिया | bestowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.353
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 333
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 333, 334
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।