बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।।
मूल पाठ
बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।।
कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई। कहि निज भाग्य बिभव बहुताई।।
स्रोत अभिलेख 1.321 · पुस्तक पृ. 302, 302
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर उन्होंने कोसलाधीश राजा दशरथजीकी पूजा उन्हें ईश (महादेवजी) के समान जानकर की, कोई दूसरा भाव न था। तदनन्तर [उनके सम्बन्धसे] अपने भाग्य और वैभवके विस्तारकी सराहना करके हाथ जोड़कर विनती और बड़ाई की॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 302 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।।
English explanation
Then Janaka honored Dasharatha, king of Kosala, regarding him as equal to God, with no other sentiment in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then; again |
| कीन्ह | की | performed |
| कोसलपति | कोसल के राजा दशरथ की | of Dasharatha, king of Kosala |
| पूजा | पूजा और आदर-सत्कार | worshipful honoring |
| जानि | समझकर | regarding as |
| ईस | ईश्वर | God |
| सम | के समान | equal to |
| भाउ | मन का भाव | inner sentiment |
| न | नहीं | not |
| दूजा | दूसरा | another |
2 कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई। कहि निज भाग्य बिभव बहुताई।।
English explanation
With folded hands, Janaka offered humble words and praise, speaking of his abundant good fortune and prosperity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | की | offered |
| जोरि | जोड़कर | joining; folding |
| कर | हाथ | hands |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble address |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| कहि | कहकर; व्यक्त करके | speaking of; expressing |
| निज | अपने | his own |
| भाग्य | सौभाग्य | good fortune |
| बिभव | वैभव; समृद्धि | splendor; prosperity |
| बहुताई | बहुलता | abundance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.321
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 302
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 302, 302
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।