बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।
मूल पाठ
बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।
दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे।।
स्रोत अभिलेख 1.339 · पुस्तक पृ. 322, 323
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने पुत्रियोंको बहुत प्रकारसे समझाया और उन्हें स्त्रियोंका धर्म और कुलकी रीति सिखायी। बहुत-से दासी-दास दिये, जो सीताजीके प्रिय और विश्वासपात्र सेवक थे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 322 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।
English explanation
AI draft: The king counseled his daughter in many ways and taught her a woman's duties and the family's customs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| भूप | राजा जनक ने | King Janaka |
| सुता | पुत्री सीता को | his daughter Sita |
| समुझाई | समझाया | counseled |
| नारिधरमु | स्त्री के कर्तव्य | a woman's duties |
| कुलरीति | कुल की परंपरा | family customs |
| सिखाई | सिखाई | taught |
2 दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे।।
English explanation
The king gave many male and female servants—servants of pure conduct who were dear to Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दासीं | दासियाँ | female servants |
| दास | दास | male servants |
| दिए | दिए | gave |
| बहुतेरे | बहुत-से | many |
| सुचि | शुद्ध आचरण वाले | of pure conduct |
| सेवक | सेवक | servants |
| जे | जो | who |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| सिय | सीता | Sita |
| केरे | के; यहाँ सीता को | to; marking Sita as the one who held them dear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.339
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 322
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 322, 323
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।