बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।।
मूल पाठ
बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।।
प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने।।
स्रोत अभिलेख 1.132 · पुस्तक पृ. 142, 142
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस समय नारदजीने भगवान्की बहुत प्रकारसे विनती की। तब लीलामय कृपालु प्रभु [वहीं] प्रकट हो गये। स्वामीको देखकर नारदजीके नेत्र शीतल हो गये और वे मनमें बड़े ही हॢषत हुए कि अब तो काम बन ही जायगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 142 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।।
English explanation
At that time Narada entreated him in many ways; the playful, compassionate Lord appeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| बिनय | विनती | entreaty |
| कीन्हि | की | made |
| तेहि | उस | that |
| काला | समय में | at the time |
| प्रगटेउ | प्रकट हुए | appeared |
| प्रभु | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| कौतुकी | कौतुक करने वाले | playful |
| कृपाला | कृपालु | compassionate |
2 प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने।।
English explanation
Seeing the Lord, the sage Narada's eyes were soothed; he rejoiced inwardly, thinking, 'My purpose will be accomplished.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | भगवान विष्णु को | the Lord Vishnu |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| मुनि | मुनि नारद के | of the sage Narada |
| नयन | नेत्र | eyes |
| जुड़ाने | शीतल हुए | were soothed |
| होइहि | हो जाएगा | will be accomplished |
| काजु | कार्य | purpose |
| हिएँ | हृदय में | in the heart |
| हरषाने | प्रसन्न हुए | rejoiced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.132
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 142
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 142, 142
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।