बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनारदजीने बहुत आर्त (दीन) होकर सब कथा कह सुनायी [और प्रार्थना की कि] कृपा कीजिये और कृपा करके मेरे सहायक बनिये। हे प्रभो! आप अपना रूप मुझको दीजिये और किसी प्रकार मैं उस (राजकन्या) को नहीं पा सकता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 142 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।।
आपन रूप देहु प्रभु मोही। आन भाँति नहिं पावौं ओही।।
स्रोत अभिलेख 1.132 · पुस्तक पृ. 142, 142
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।।
English explanation
In great distress, Narada related the matter: 'Show mercy, and graciously become my helper.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | greatly |
| आरति | व्याकुलता से | in distress |
| कहि | कहकर | having told |
| कथा | वृत्तांत | the account |
| सुनाई | सुनाया | related |
| करहु | कीजिए | please show |
| कृपा | कृपा | mercy |
| करि | करके | having shown |
| होहु | बनिए | please become |
| सहाई | सहायक | a helper |
2 आपन रूप देहु प्रभु मोही। आन भाँति नहिं पावौं ओही।।
English explanation
Lord, give me your own appearance; in no other way can I win that princess.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपन | अपना | your own |
| रूप | रूप-सौंदर्य | beautiful appearance |
| देहु | दीजिए | please give |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| मोही | मुझे | to me |
| आन | अन्य | another |
| भाँति | रीति से | by a means |
| नहिं | नहीं | not |
| पावौं | मैं पा सकूँगा | can I win |
| ओही | उस राजकुमारी को | that princess |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.132
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 142
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 142, 142
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।