बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती।।
मूल पाठ
बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती।।
भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ। मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 267, 268
भावार्थ
मूल पाठ के बादहाथ चलता नहीं, क्रोधसे छाती जली जाती है। [हाय!] राजाओंका घातक यह कुठार भी कुण्ठित हो गया। विधाता विपरीत हो गया, इससे मेरा स्वभाव बदल गया, नहीं तो भला, मेरे हृदयमें किसी समय भी कृपा कैसी?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 267 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती।।
English explanation
My hand will not move, and anger burns my chest; my king-slaying axe has become blunted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहइ | चलता है | moves |
| न | नहीं | not |
| हाथु | हाथ | hand |
| दहइ | जलाता है | burns |
| रिस | क्रोध | anger |
| छाती | छाती को | the chest |
| भा | हो गया | has become |
| कुठारु | फरसा | axe |
| कुंठित | कुंद, निष्प्रभावी | blunted, ineffective |
| नृपघाती | राजाओं का संहार करने वाला | slayer of kings |
2 भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ। मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ।।
English explanation
Fate has turned against me, and my nature has changed. How could compassion ever arise in my heart?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया | has become |
| बाम | प्रतिकूल | adverse |
| बिधि | विधाता, भाग्य का विधानकर्ता | the disposer of fate |
| फिरेउ | बदल गया | has changed |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| मोरे | मेरे | my |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| कृपा | दया | compassion |
| कसि | कैसे | how |
| काऊ | कभी भी | ever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 267
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 267, 268
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